चार वर्षिय स्नातक कोर्स में बडा़ बदलाव- बदल गया सिलेबस- जल्दी देखें:-भारत में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उच्च शिक्षा प्रणाली में लगातार बड़े सुधार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUGP – Four Year Undergraduate Programme) में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब स्नातक की पढ़ाई केवल किताबों और परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें सामाजिक सेवा, खेल, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास को भी अनिवार्य रूप से शामिल कर दिया गया है।
यह फैसला खासतौर पर बिहार के विश्वविद्यालयों में लागू किया गया है, जिसे शिक्षा जगत में एक ऐतिहासिक और दूरगामी बदलाव माना जा रहा है। इस लेख में हम आपको इस नए सिलेबस की पूरी जानकारी आसान भाषा में देंगे।
FYUGP क्या है? (Four Year Undergraduate Programme)
FYUGP यानी चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, जिसे NEP 2020 के तहत लागू किया गया है। इसके तहत छात्र:-
- 1, 2, 3 या 4 वर्ष बाद डिग्री/डिप्लोमा लेकर निकल सकते हैं
- चौथे वर्ष में रिसर्च और मल्टी-डिसिप्लिनरी पढ़ाई का अवसर मिलता है
- क्रेडिट सिस्टम के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है
अब इसी FYUGP में सामाजिक सेवा और खेल को सिलेबस का हिस्सा बना दिया गया है।
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में सामाजिक सेवा, खेल शामिल
बिहार लोक भवन की पाठ्यक्रम समिति की अनुशंसा पर कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खां ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रमों के चौथे सेमेस्टर क्षमता संवर्द्धन पाठ्यक्रम (एईसी-4) के पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी।
विकल्प के तौर पर इन कोर्स में डिग्री लेने का मौका मिलेगा
इसमें गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक सेवा, खेल (स्वास्थ्य और कल्याण) पाठ्यक्रम शामिल हैं। इससे राज्य के विभिन्न विवि के छात्र-छात्राओं को विकल्प के तौर पर इन कोर्स में डिग्री लेने का मौका मिल गया है। बुधवार को लोक भवन ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
राज्यपाल के प्रधान सचिव आरएल चोंग्थू ने कहा कि
इस संबंध में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और नालंदा खुला विश्वविद्यालय को छोड़ कर राज्य के सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी अवगत करा दिया है। साथ ही जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं। यह ऐसा कोर्स है, जो छात्र-छात्राओं में व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व, अनुशासन और सेवा के क्षेत्र में गुण विकसित करने में मदद करेगा। ये कोर्स कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की योग्यता बढ़ाने वाला कोर्स हैं। इस कोर्स के जरिये बौद्धिक क्षमता का विकास होगा।
एनजीओ के प्रावधान
छात्र को एईसी-4 पाठ्यक्रम में पंजीकृत गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा आदि क्षेत्रों में न्यूनतम 30 घंटे का स्वैच्छिक कार्य करने का विकल्प भी मिलेगा। अंक प्रदान करने के लिए संबंधित एनजीओ की मूल्यांकन रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर छात्र-छात्राओं को अंक मिलेंगे।
इन विश्वविद्यालयों के छात्र | छात्राएं ये कोर्स कर सकेंगे
पटना विवि पटना, मगध विवि गया, वीर कुंवर सिंह विवि आरा, बाबा साहब भीमराव आंबेडकर विवि मुजफ्फरपुर, जयप्रकाश नारायण विवि छपरा, पूर्णिया विवि, मुंगेर विवि, तिलकामांझी विवि भागलपुर, कामेश्वर सिंह दरभंगा विवि, ललित नारायण मिथिला विवि, बीएन मंडल विवि मधेपुरा और मौलाना मजहरूल हक अरबी फारसी विवि ।
पीयू छात्रसंघ ने कॉलेजों में 17 वाटर कूलर लगाए
पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने विभिन्न कॉलेजों में बुधवार को 17 वाटर कूलर और प्यूरिफायर लगाए हैं। इनमें मगध महिला कॉलेज, वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज, बीएन कॉलेज, दरभंगा हाउस, पटना कॉलेज, पटना साइंस कॉलेज, वाणिज्य महाविद्यालय और पटना लॉ कॉलेज शामिल है। कई महीनों से कॉलेजों के विद्यार्थी शुद्ध पेयजल की समस्या दूर करने की मांग छात्र संघ से कर रहे थे। उद्घाटन के दौरान पटना विवि छात्रसंघ अध्यक्ष मैथिली मृणालिनी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज और पटना ट्रेनिंग कॉलेज में इसी सप्ताह वाटर कूलर लगाए जाएंगे।
सामाजिक सेवा
वैसे उच्च शिक्षा संस्थान जिन्होंने उन्नत भारत अभियान योजना लागू की है और इन योजनाओं के तहत अपने छात्रों को सामाजिक सेवा के लिए भेज रहे हैं, उन्हें भी एईसी-4 के अंतर्गत माना जाएगा, लेकिन शर्त है कि छात्र कम से कम 30 घंटे की सेवा पूरी करें। मूल्यांकन प्रक्रिया समन्वयक की तरफ से संचालित की जायेगी। सामाजिक सेवा के कार्य के आधार पर अंक मिलेंगे।
खेलकूद (स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती)
जिम, स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती जैसी गतिविधियों में 30 घंटे बिताने वाले छात्र भी एईसी-4 के लिए पात्र होंगे। मूल्यांकन संबंधित शिक्षक, प्रशिक्षक, समन्वयक इस उद्देश्य के लिए नामित व्यक्ति द्वारा किया जाएगा।
- लोक भवन ने अधिसूचना जारी कर दी
- कोर्स छात्र-छात्राओं की योग्यता बढ़ाने वाला होगा
- बिहार लोक भवन की पाठ्यक्रम समिति की अनुशंसा पर कुलाधिपति ने दी मंजूरी
चार वर्षीय स्नातक कोर्स में क्या है बड़ा बदलाव?
नए सिलेबस के अनुसार अब छात्रों को डिग्री पाने के लिए सिर्फ अकादमिक विषय ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल सामाजिक गतिविधियाँ भी पूरी करनी होंगी।
1. सामाजिक सेवा (Social Service) अनिवार्य
अब हर छात्र को अपने स्नातक पाठ्यक्रम के दौरान कम से कम 30 घंटे की सामाजिक सेवा करनी होगी।
सामाजिक सेवा में क्या-क्या शामिल होगा?
- स्वच्छता अभियान
- शिक्षा से वंचित बच्चों को पढ़ाना
- स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम
- महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्य
- पर्यावरण संरक्षण
- सरकारी/मान्यता प्राप्त NGO के साथ कार्य
यह सामाजिक सेवा केवल औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि इसकी रिपोर्ट, मूल्यांकन और अंक भी तय किए जाएंगे।
2. खेल, स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती (Sports & Wellness)
नए सिलेबस में छात्रों की शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत:-
- योग, व्यायाम, खेलकूद गतिविधियाँ
- मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता
- टीम वर्क और अनुशासन सिखाने वाले खेल
छात्रों को यहां भी कम से कम 30 घंटे की भागीदारी करनी होगी।
क्रेडिट सिस्टम से जुड़ा मूल्यांकन
यह दोनों गतिविधियाँ – सामाजिक सेवा और खेल – अब क्रेडिट सिस्टम के तहत होंगी।
- हर गतिविधि के लिए निर्धारित क्रेडिट
- ग्रेड/अंक सीधे मार्कशीट में जुड़ेंगे
- FYUGP-4 (चौथा वर्ष) पूरा करने के लिए यह अनिवार्य
बिना इन क्रेडिट्स के छात्र को डिग्री नहीं मिलेगी।
किन विश्वविद्यालयों में लागू हुआ नया सिलेबस?
बिहार लोक भवन की पाठ्यक्रम समिति की सिफारिश पर यह बदलाव राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों में लागू किया गया है, जैसे:-
- पटना विश्वविद्यालय
- मगध विश्वविद्यालय
- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (आरा)
- बी.आर. अम्बेडकर बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर)
- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (दरभंगा)
- पूर्णिया विश्वविद्यालय
- मुंगेर विश्वविद्यालय
- पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय
कॉलेजों में क्या व्यवस्था की जाएगी?
नए सिलेबस को सही ढंग से लागू करने के लिए कॉलेज स्तर पर कई व्यवस्थाएँ की जा रही हैं:-
- सामाजिक सेवा के लिए NGO/सरकारी संस्थाओं से समन्वय
- छात्रों की उपस्थिति और कार्य का रिकॉर्ड
- गतिविधियों की रिपोर्ट और फीडबैक सिस्टम
- कॉलेज परिसरों में खेल और फिटनेस सुविधाएँ
छात्रों के लिए जरूरी सलाह
- कॉलेज द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें
- सामाजिक सेवा के प्रमाण (Certificate/Report) सुरक्षित रखें
- खेल और फिटनेस गतिविधियों में नियमित भाग लें
- समय पर क्रेडिट पूरा करें
निष्कर्ष (Conclusion)
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में किया गया यह बदलाव केवल सिलेबस का परिवर्तन नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा सोच का बदलाव है। अब डिग्री सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि समाज, स्वास्थ्य और जिम्मेदारी से जुड़ी होगी।
यदि छात्र इस अवसर को सही ढंग से अपनाते हैं, तो यह बदलाव उनके करियर और जीवन – दोनों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।
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