वकालत में बनाना चाहते हैं कैरियर – तो यहाँ से करें कोर्स – लाखों में सैलरी

वकालत में बनाना चाहते हैं कैरियर - तो यहाँ से करें कोर्स - लाखों में सैलरी

वकालत में बनाना चाहते हैं कैरियर – तो यहाँ से करें कोर्स – लाखों में सैलरी:-आज के समय में वकालत (Law Career) केवल अदालत में खड़े होकर बहस करने तक सीमित नहीं रही। बदलते भारत, डिजिटल तकनीक, कॉरपोरेट सेक्टर और स्टार्टअप संस्कृति ने वकालत को एक हाई-प्रोफाइल और लाखों की सैलरी वाला करियर बना दिया है।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि वकालत क्या है, वकील कैसे बनते हैं, कौन-सी पढ़ाई करनी पड़ती है और इस नौकरी के क्या फायदे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए पूरी जानकारी देगा।

वकालत एक ऐसा पेशा है जिसमें व्यक्ति कानून की पढ़ाई करके लोगों, संस्थाओं या सरकार को कानूनी सलाह देता है और न्याय दिलाने का काम करता है

सरल शब्दों में:-

कानून को समझना + उसे लागू करना + लोगों के अधिकारों की रक्षा करना = वकालत

वकील का काम केवल कोर्ट में केस लड़ना ही नहीं होता, बल्कि:-

  • कानूनी सलाह देना
  • कॉन्ट्रैक्ट बनाना
  • कंपनियों को लीगल गाइडेंस देना
  • साइबर अपराध, टैक्स, संपत्ति विवाद जैसे मामलों को संभालना
    • भी वकालत के अंतर्गत आता है।
  • अगर आप 12वीं के बाद वकील बनना चाहते हैं → 5 साल का कोर्स
  • अगर आप ग्रेजुएशन के बाद वकील बनना चाहते हैं → 3 साल का कोर्स
  • BA LLB
  • BBA LLB
  • BCom LLB
  • LLB
  • CLAT
  • AILET
  • LSAT India
  • State Law CET
  • कोर्ट
  • लॉ फर्म
  • कॉरपोरेट कंपनियाँ
  • स्टेट बार काउंसिल में नाम दर्ज
  • All India Bar Examination (AIBE) पास करना

इसके बाद आप ऑफिशियली वकील बन जाते हैं

  • भारतीय संविधान
  • IPC, CrPC, CPC
  • कॉन्ट्रैक्ट लॉ
  • फैमिली लॉ
  • क्रिमिनल लॉ
  • कॉरपोरेट लॉ
  • साइबर लॉ
  • लीगल ड्राफ्टिंग

देश में लगभग 20 लाख पंजीकृत वकील हैं, जो दर्शाता है कि यह पेशा पहले से ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया है। बावजूद इसके, अवसरों की कमी नहीं है। अनुमान है कि लीगल सर्विसेज सेक्टर 2030 तक 28 हजार करोड़ रुपये का हो सकता है, यानी यह क्षेत्र सालाना 6 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रहा है। यह इस बात का संकेत है कि परंपरागत और आधुनिक दोनों तरह के कानूनी पेशेवरों की मांग बनी हुई है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से बीते साल संशोधित नियमों के तहत विदेशी लॉ फर्मों और वकीलों को भारत में कॉरपोरेट लॉ, विलय और अधिग्रहण, इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन और क्रॉस बॉर्डर ट्रांजैक्शन के क्षेत्र में काम करने की अनुमति का रास्ता साफ हो चुका है।

इन बदलावों से भारतीय युवा वकीलों के लिए इन क्षेत्रों में ग्लोबल क्लाइंट्स और अंतरराष्ट्रीय डील्स में अवसर बनेंगे। इसके लिए युवा वकील सॉलिसिटर्स क्वालिफाइंग एग्जाम, कैलिफोर्निया बार एग्जाम पास कर योग्यता हासिल कर सकते हैं और क्रॉस बॉर्डर डील्स व आर्बिट्रेशन में कौशल बढ़ा सकते हैं।

भारत की बात करें, तो इस क्षेत्र में बतौर वकील कोर्ट में प्रैक्टिस करना आज भी मजबूत विकल्प है। सिविल, क्रिमिनल, फैमिली, प्रॉपर्टी और संवैधानिक लॉ में विशेषज्ञ वकीलों की हमेशा मांग रहती है।

हालांकि, वक्त के साथ कॉरपोरेट लॉ, मर्जर-एक्विजिशन, टैक्स, इंटरनेशनल ट्रेड, एआई, एन्वायर्नमेंटल सोशल ऐंड गवर्नेस सेक्टर, साइबर लॉ और डाटा प्राइवेसी जैसे नए क्षेत्रों में अवसर तेजी से बढ़े हैं। लॉ ग्रेजुएट्स अब पॉलिसी मेकिंग, लीगल जर्नलिज्म, रिसर्च, आर्बिट्रेशन, कंसल्टेंसी और लीगल टेक स्टार्टअप्स में भी मौके पा रहे हैं।

एलएलबी तीन साल का कोर्स है, जिसे ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है और यह केवल कानूनी विषयों पर केंद्रित होता है। वहीं, इंटीग्रेटेड एलएलबी पांच साल का कोर्स है, जिसे 12वीं के बाद किया जा सकता है, जैसे बीए एलएलबी या बीकॉम एलएलबी। इसमें कानून के साथ अन्य विषय भी पढ़ाए जाते हैं, जिससे छात्रों को शुरू से व्यापक समझ मिलती है। कॉरपोरेट और आधुनिक लॉ करिअर के लिए इसे अधिक व्यावहारिक माना जाता है।

कई संस्थान 1-2 साल के डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स कराते हैं। एनएलएसआईयू, जामिया मिलिया इस्लामिया और आईएलएस लॉ कॉलेज पुणे जैसे संस्थान साइबर लॉ, लेबर लॉ और आईपी आर में विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। हालांकि इन कोर्स की मान्यता जरूर देख लें।

कितनी होगी आयः कमाई के लिहाज से भी लॉ करियर में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। हाल की प्लेसमेंट रिपोर्टों के अनुसार 2025 में कुछ टॉप लॉ फम्र्स ने नए ग्रेजुएट्स को 19 से 25 लाख रुपये तक का सालाना पैकेज ऑफर किया है, खासकर उन छात्रों को जो कॉर्पोरेट लॉ, टेक लॉ, टैक्स या कंप्लायंस जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित हैं। कॉर्पोरेट लॉयर, लीगल कंसल्टेंट, कॉन्ट्रैक्ट मैनेजर और कंप्लायंस ऑफिसर जैसे पदों में फ्रेशर्स की शुरुआत आमतौर पर 6 से 10 लाख रुपये सालाना से देखी जा रही है। 5 से 8 साल के अनुभव वाले कॉरपोरेट या स्पेशलाइज्ड वकील 30 लाख रुपये से ज्यादा कमा सकते हैं।

  • नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बेंगलुरु, nis.ac.in
  • नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू), दिल्ली, nludelhi.ac.in
  • जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई), नई दिल्ली, jmi.ac.in
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), bhu.ac.in
  • सिंबायोसिस लॉ स्कूल, symlaw.ac.in

भारत में लॉ की पढ़ाई के लिए क्लैट (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट), एआईएलईटी और एलसैट- इंडिया परीक्षाएं प्रमुख है। इसके अलावा स्लैट (सिम्बायोसिस लॉ स्कूल), सीयूईटी (यूजी) कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे बीएचयू में प्रवेश के लिए होती हैं। क्लैट यूजी देश भर के 26 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के लिए दिसंबर माह में होती है, जबकि एआईएलईटी केवल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के लिए है। एलसैट- इंडिया की कई निजी लॉ स्कूलों में मान्यता है।

वर्तमान में लॉ के क्षेत्र में सर्वाधिक मांग साइबर सुरक्षा कानून, बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकार, कॉरपोरेट कानून, श्रम कानून और तकनीक/एआई कानून की है। डिजिटल विकास के चलते डाटा गोपनीयता और तकनीकी अनुबंधों में विशेषज्ञता की जरूरत तेजी से बढ़ रही है, खासकर कॉरपोरेट, टैक्स और रियल एस्टेट क्षेत्रों में।

नहीं

आज वकील काम कर रहे हैं:-

  • मल्टीनेशनल कंपनियों में
  • बैंक और इंश्योरेंस सेक्टर में
  • स्टार्टअप्स के लीगल एडवाइजर के रूप में
  • टेक और साइबर कंपनियों में
  • एनजीओ और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में
  • फ्रेशर: ₹20,000 – ₹50,000/महीना
  • 3–5 साल अनुभव: ₹1–2 लाख/महीना
  • कॉरपोरेट/इंटरनेशनल: ₹3–5 लाख/महीना
  • सीनियर लेवल: ₹50 लाख+ सालाना
  • आत्मविश्वास
  • लॉजिकल सोच
  • अच्छी भाषा शैली
  • लगातार सीखने की आदत
  • सही स्पेशलाइजेशन

वकालत आज सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि सम्मान, स्थिरता और हाई इनकम वाला करियर बन चुका है।
अगर आप सही पढ़ाई, सही दिशा और मेहनत करते हैं, तो वकालत में लाखों की सैलरी और मजबूत पहचान दोनों मिल सकती है।

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