किसान आईडी घर बैठे बनेगा- यहाँ से करें आवेदन फार्मर रजिस्ट्री आईडी के लिए

किसान आईडी घर बैठे बनेगा- यहाँ से करें आवेदन फार्मर रजिस्ट्री आईडी के लिए

किसान आईडी घर बैठे बनेगा- यहाँ से करें आवेदन फार्मर रजिस्ट्री आईडी के लिए:-बिहार सरकार द्वारा किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए फार्मर रजिस्ट्री (किसान आईडी) अभियान चलाया जा रहा है। यह आईडी किसानों की डिजिटल पहचान है, जिसके बिना आने वाले समय में कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना कठिन हो सकता है।

लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि बिहार में करीब 90 लाख किसानों में से अभी केवल 10 लाख किसानों की ही किसान आईडी बन पाई है। बड़ी संख्या में किसान अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं।

  • किसान आईडी क्या है
  • किसान आईडी क्यों जरूरी है
  • घर बैठे किसान आईडी कैसे बनाएं
  • रजिस्ट्रेशन में आ रही समस्याएं
  • जिनकी जमाबंदी अपने नाम पर नहीं है वे क्या करें

सशक्त एवं समृद्ध किसान बिहार की पहचान

  • कृषकों द्वारा सरकारी योजनाओं का सहज एवं शीघ्र लाभ प्राप्त करने एवं किसानों के अभिलेखों की डिजिटल पहचान के लिए फार्मर रजिस्ट्री आवश्यक है।
  • बिहार फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल ” URL -https://bhfr.agristack.gov.in/farmer-registry-bh/#/” पर जाकर आप स्वयं अपना फार्मर आई०डी० बनाऐं।
  • आधार कार्ड
  • मोबाइल नम्बर
  • भूमि से सम्बन्धित दस्तावेज (स्वयं के नाम का ऑन लाईन जमाबंदी संबंधित दस्तावेज)

कृषि विभाग की योजनाओं-विशेषकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का सहज लाभ प्राप्त करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री आई०डी० आवश्यक है।

“किसान स्मार्ट/डिजिटल एग्रीकल्चर के साथ कृषि के आधुनिक उपायों के प्रति स्वयं जागरूक होकर अपने अभिलेखों की डिजिटल पहचान के रूप में फार्मर रजिस्ट्री आज ही बनवायें।”

नोटः- फॉर्मर रजिस्ट्री बनवाने के लिए विशेष अभियान 11 जनवरी 2026 तक चलाया जा रहा है।

इस संबंध में किसी भी भी समस्या के लिए जिला के जिला कृषि पदाधिकारी/ अनुमंडल कृषि पदाधिकारी/ प्रखंड कृषि पदाधिकारी/कृषि समन्वयक / किसान सलाहकार से संपर्क करें।

  • कृषि विभाग 18001801551
  • राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग 18003456215

बिहार के 90 लाख से ज्यादा किसानों में से सिर्फ 10.46 लाख की ही फार्मर आईडी बनी है। यह अबतक की स्थिति है। पीएम किसान सम्मान निधि से अब तक 75 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं। लेकिन इनमें से भी 65 लाख किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है।

पिछले दो दिनों में फॉर्मर आईडी बनाने में रिकॉर्ड उपलब्धि हुई। 9 जनवरी को दिनभर में 1.86 लाख फॉर्मर आईडी बनाई गई। पर अबतक के आंकड़े बता रहे कि किसान, सरकार के इस अभियान से दूर हैं। ये आईडी जरूरी इसलिए है कि क्योंकि इसके आधार पर ही किसानों को अब केंद्र और राज्य की सभी कल्याणकारी योजनाओं के पैसे मिलेंगे।

फार्मर आईडी बिहार में अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जिन किसानों को पहले से सरकारी लाभ मिल रहा था, वे भी नई व्यवस्था से नहीं जुड़ पा रहे। जमीनी स्तर पर अभियान का असर बेहद सीमित है। यदि यही रफ्तार रही, तो सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़ने में वर्षों लग जाएंगे।

  • ऑनलाइन प्रक्रिया किसानों के लिए जटिल है, क्योंकि वे पूरी तरह अत्याधुनिक सिस्टम से अवगत नहीं हैं।
  • जमीन रिकॉर्ड की गड़बड़ी, आपसी बंटवारा नहीं होना बड़ी वजह।
  • खाता-खेसरा अपडेट नहीं, जिसके जिम्मे जमीन, दस्तावेज में उसका नाम नहीं
  • नाम में स्पेलिंग मिस्टेक, खाता खेसरा के नंबर सही नहीं
  • पुश्तैनी जमीन के कारण ऑनलाइन रजिस्टर और जमीन दस्तावेजों में मेल नहीं
  • जानकारी की भारी कमी, फायदे गांवों में किसानों को स्पष्ट नहीं
  • सीएससी और कर्मियों की सीमित क्षमता, सेंटर पर भीड़, ऑपरेटरों की संख्या कम
  • भूमिहीन और बटाईदार किसान यानी बटाई पर खेती करने वाले जिनके नाम जमीन नहीं है।

सरकार ने साफ कर दिया है कि आगे चलकर केंद्र व राज्य की सभी योजनाओं का पैसा सिर्फ फार्मर आईडी से जुड़े खाते में ही जाएगा। यानी पीएम किसान, फसल बीमा, कृषि इनपुट सब्सिडी, आपदा राहत, बीज, खाद, सिंचाई अनुदान सब कुछ फार्मर आईडी से लिंक हो जाएगा। यदि किसान आईडी से बाहर रहे तो सरकारी लाभ से वंचित हो जाएंगे।

खेती किसानी से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफलाइन विकल्प, कैंप आधारित रजिस्ट्रेशन और जमीन रिकॉर्ड की समस्याओं का जब तक समाधान नहीं होगा, फार्मर आईडी अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो सकता है। इसके लिए गांव-स्तर पर विशेष कैंप लगाना होगा। भूमि रिकॉर्ड सुधार तेजी से करना होगा। ऐसा नहीं होने पर फार्मर आईडी योजना किसानों के लिए कल्याणकारी की जगह बाधक बन सकती है।

किसानों को फार्मर रजिस्ट्रेशन कराने में कई तरह की परेशानी हो रही है। जिन किसानों का जमीन पूर्वजों के नाम पर है उनका फार्मर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। मनेर के दियारा क्षेत्र में 90 प्रतिशत लोगों की जमीन की जमाबंदी पूर्वजों के नाम पर है।

रजिस्ट्रेशन के लिए किसानों के स्वयं के नाम से राजस्व रसीद एवं जमाबंदी भूमि का कागजात जरूरी है। इसके अलावा जमीन के कागजात एवं आधार कार्ड में दर्ज नाम या पिता के नाम में अंतर है तो किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। इधर कुछ दिनों से एफआर पोर्टल में तकनीकी खराबी आने से भी पोर्टल काम नहीं कर रहा है, और रजिस्ट्रेशन एप नहीं खुल रहा है। कई किसान सलाहकार एवं समन्वयकों ने बताया कि शुक्रवार को भी एप नहीं खुला।

अंचल कर्मचारियों का कहना है कि दियारा क्षेत्र के करीब 90 फीसदी लोगों के पास जमीन का बंटवारा नहीं है। जमीन के कागजात किसी गोतिया पट्टीदार के पास है भी तो वो नहीं दे रहा है। जिससे लिखित बंटवारा नहीं हो पा रहा है। मौखिक बंटवारे के आधार पर जमीन पर रैयती अपने-अपने हिस्से पर खेती तो कर रहे हैं, लेकिन ऐसे रैयतों के नाम पर जमाबंदी कायम नहीं है। इस वजह से भी किसानों का रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो रही है।

रजिस्ट्रेशन एप में कर्मचारियों को सिर्फ खेसरा नम्बर से जमीन जांच करने का ऑप्शन है। खाता एवं नाम से जांच करने का ऑप्शन एप में नहीं है, इस वजह से भी किसानों का रिकॉर्ड खोजने में कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। वहीं किसान सलाहकार एवं समन्यवक किसानों का ई-केवाईसी तो कर दे रहे हैं लेकिन जब राजस्व कर्मचारी जांच कर रहे हैं तो उनके नाम से जमाबंदी नहीं मिल रही है और उनका एफआर नहीं हो पा रहा है।

अंचलाधिकारी पूजा कुमारी ने बताया कि गुरुवार को करीब दो सौ एवं शुक्रवार को 251 एवं शनिवार को 360 रैयती का एफआर किया गया है। अभी जिनका स्वयं के नाम पर जमाबंदी है उन्हीं का फार्मर रजिस्ट्रेशन हो रहा है। लेकिन स्वयं जमाबंदी रैयत के नाम पर होने के बाद ही एफआर सक्सेस हो रहा है। दियारा क्षेत्र में स्वयं जमाबंदी रैयत में 10 फीसदी लोग ही मिल रहे हैं।

किसान आईडी बिहार सरकार के कृषि विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल पहचान प्रणाली है। इसके तहत प्रत्येक किसान को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाता है, जिसमें उसकी जमीन, फसल और व्यक्तिगत जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होती है।

यह प्रणाली AgriStack के तहत विकसित की जा रही है।

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ किसान आईडी के बिना नहीं मिलेगा

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
  • फसल बीमा योजना
  • कृषि अनुदान एवं सब्सिडी
  • बीज, खाद और सिंचाई से जुड़ी योजनाएं
  • प्राकृतिक आपदा या फसल क्षति मुआवजा
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़ी सुविधाएं

किसान-आईडी के लिए बहुत ज्यादा दस्तावेज नहीं मांगे जा रहे हैं, लेकिन कुछ जरूरी कागजात अनिवार्य हैं:-

  1. आधार कार्ड
  2. मोबाइल नंबर (आधार से लिंक होना बेहतर)
  3. भूमि से संबंधित दस्तावेज
    • स्वयं के नाम की ऑनलाइन जमाबंदी
    • या पैतृक भूमि के दस्तावेज

किसान घर बैठे भी अपनी आईडी बना सकते हैं।

  1. आधिकारिक पोर्टल पर जाएं
    https://bhfr.agristack.gov.in/farmer-registry-bh
  2. “Farmer Registration” विकल्प चुनें
  3. आधार नंबर दर्ज करें और OTP सत्यापन करें
  4. व्यक्तिगत विवरण भरें
  5. भूमि विवरण जोड़ें (जमाबंदी से लिंक)
  6. फॉर्म सबमिट करें
  7. सत्यापन के बाद आपकी किसान आईडी जनरेट हो जाएगी

किसान आईडी अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्यता बन चुकी है। जिन किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

अगर समय रहते किसान आईडी नहीं बनी, तो आने वाले समय में:-

  • सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ सकता है
  • सब्सिडी और सहायता में देरी हो सकती है

इसलिए आज ही किसान आईडी बनवाएं और डिजिटल किसान बनें।

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