बिहार में जमीन सर्वे फिर से शुरू – सरकार बनते ही हुआ बड़ा बदलाव

बिहार में जमीन सर्वे फिर से शुरू - सरकार बनते ही हुआ बड़ा बदलाव

बिहार में जमीन सर्वे फिर से शुरू – सरकार बनते ही हुआ बड़ा बदलाव:- बिहार में 90 साल बाद जमीन सर्वे फिर से शुरू हो चुका है। नई सरकार ने इसकी अवधि बढ़ाकर जुलाई 2026 से अब दिसंबर 2027 तक कर दी है। जमीन सर्वे इतना जरूरी क्यों है? यह कैसे होता है? और एक जमीन मालिक को सर्वे के समय क्या-क्या करना चाहिए?

राज्य सरकार ने बताया कि सर्वे के काम को तेजी से पूरा करने के लिए पूरे बिहार में 14,000 कर्मियों की तैनाती की जाएगी। साथ ही, 37384 नए गांवों में अगस्त 2024 से सर्वे कार्य की शुरुआत हो चुकी है।

यहाँ हम पूरे विवरण को सरल भाषा में समझेंगे।

जमीन सर्वे की अवधि डेढ़ साल बढ़ाई गई है। जुलाई 2026 की जगह अब 2027 तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। सोमवार को उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग का कार्यभार संभाला। अधिकारियों ने उन्हें यह जानकारी दी।

राज्य के सभी 38 जिलों के 534 अंचलों में जमीन सर्वे चल रहा है। राज्य के 45 हजार गांवों में से 5657 राजस्व गांवों में वर्ष 2012 से सर्वे चल रहा है। लेकिन अब इनमें से तक सिर्फ 25% गांवों का सर्वे पूरा हुआ है। अगस्त 2024 में 37384 गांवों में नया सर्वे शुरू किया गया।

इस काम में पूरे राज्य में 14 हजार सर्वे कर्मी लगे हैं। हर 4 गांव पर एक अमीन (कुल 8035) काम कर रहा है। विभाग द्वारा 27 करोड़ पन्नों के अभिलेख स्कैन कर अपलोड किए जा रहे हैं। रैयतों को 48 घंटे में डिजिटल साइन कॉपी मिल रही है।

बिहार में 90 साल बाद जमीन सर्वे हो रहा है। 100 साल पुराने खतियान और आपसी बंटवारा नहीं होने से कई मामले जटिल हैं। कई अंचल कार्यालयों में भी आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण जमीन मालिकों से स्वघोषणा के आधार पर जमीन का ब्यौरा लिया जा रहा है। 16 अगस्त से 20 सितंबर तक चले राजस्व महाअभियान में मिले 45 लाख आवेदनों की स्कैनिंग पूरी हो गई है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में शिविर लगाकर इन आवेदनों का निपटारा किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए म्यूटेशन की नई सुविधा शुरू की जा रही है। अब एक ही जमाबंदी में सभी फ्लैटधारियों का म्यूटेशन हो जाएगा। अभी जागरूक फ्लैटधारी ही म्यूटेशन करवाते हैं। अधिकांश लोग पटना नगर निगम के निबंधन को ही म्यूटेशन मानकर काम चलाते हैं। विभाग को राजस्व नुकसान होता है।

सीओ से लेकर आयुक्त तक के कोर्ट ऑनलाइन किए जा रहे हैं। वादी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित रह सकेंगे। इसके लिए विभाग व्यवस्था कर रहा है। विभाग कॉल सेंटर और ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली भी शुरू कर रहा है। अंचल कार्यालयों में भीड़ कम करने के लिए सभी अंचलों में सीएससी के वीएलई बैठाए जा रहे हैं।

अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने वाली शक्तियों के खिलाफ जीरो- टॉलरेंस की नीति रहेगी। भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की
जाएगी। सीओ कार्यालय से लेकर सचिवालय तक विभाग अपनी कार्यप्रणाली को पारदर्शी, भ्रष्टाचारमुक्त और नागरिक केंद्र बनाया गया। विजय कुमार सिन्हा, उप मुख्यमंत्री

जमीन सर्वे क्या होता है?

जमीन-सर्वे एक सरकारी प्रक्रिया है, जिसमें पूरे गांव या इलाके की जमीन की माप, सीमा निर्धारण, प्लॉट/खेसरा नंबर सत्यापन, और नया जमीन रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इससे जमीन की सटीक जानकारी सरकार और आम जनता के पास रहती है।

सरल शब्दों में —
सरकार यह पता लगाती है कि किसकी कितनी और कहाँ जमीन है, और इसका नया नक्शा तैयार करती है।

जमीन सर्वे क्यों जरूरी होता है?

जमीन-सर्वे होने पर कई बड़े फायदे मिलते हैं:-

90 साल पुराने नक्शे गलत हो चुके हैं। सड़कें, नदियाँ और सीमाएँ बदल गई हैं।

गलत माप या गलत सीमा विवाद का सबसे बड़ा कारण है। सर्वे इसे खत्म करता है।

नए सर्वे के बाद म्यूटेशन ऑनलाइन और तेज होता है।

हर जमीन का अपडेटेड नक्शा और रिकार्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा।

बिहार जमीन सर्वे 2027 की प्रक्रिया – चरणबद्ध (Step-by-Step Process)

बिहार में जमीन सर्वे कई चरणों में पूरा किया जाता है।

पूरे गांव की चारों तरफ की सीमा तय की जाती है। इससे हर घर की जमीन किस क्षेत्र में आती है, यह साफ होता है।

कर्मचारी हर घर पहुंचकर पूछते हैं:-

  • कितनी जमीन है?
  • कहाँ स्थित है?
  • कौन-सी जमीन विवादित है?
  • प्लॉट/खेसरा नंबर क्या है?

इन सभी सूचनाओं को डिजिटल डिवाइस में दर्ज किया जाता है।

यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है।

जमीन मालिक से एक लिखित घोषणा ली जाती है कि:-

  • जमीन कितनी है
  • किस प्लॉट में है
  • कब खरीदें
  • कौन-कौन वारिस हैं
  • कोई विवाद है या नहीं

बिहार में इसे 16–20 दिनों के भीतर जमा करना होता है

सर्वे टीम जमीन की माप नीचे दिए आधुनिक उपकरणों से करती है:-

  • ETS मशीन
  • DGPS
  • ड्रोन कैमरा

इससे जमीन का बेहद सटीक डिजिटल नक्शा तैयार होता है।

पहला नक्शा तैयार होता है, जिसे ड्राफ्ट मैप कहा जाता है।
इसमें जमीन की सीमा, प्लॉट, रास्ता, नाला, घर आदि मार्क किए जाते हैं।

यदि किसी जमीन मालिक को ड्राफ्ट नक्शे में गलती लगे तो:-

  • CO ऑफिस
  • DCLR ऑफिस

में आपत्ति दर्ज की जा सकती है।

सभी आपत्तियों के बाद फाइनल नक्शा लॉक किया जाता है।
इसके बाद जारी होते हैं:-

  • नया खतियान
  • नया प्लॉट/खेसरा
  • RoR
  • जमाबंदी रजिस्टर

सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध होता है।

अब म्यूटेशन पूरी तरह ऑनलाइन:-

  • CO
  • DCLR
  • DM
  • Commissioner Court

सब जगह फाइल डिजिटल जाती है।

जमीन मालिक को सर्वे के दौरान क्या-क्या करना चाहिए?

यह भाग जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है:-

इसमें:-

  • प्लॉट नंबर
  • जमीन का प्रकार
  • क्षेत्रफल
  • मालिकों के नाम
  • खरीद बिक्री की जानकारी

अत्यंत सही लिखें।

  • जमीन रसीद (लगान)
  • पुराना खतियान
  • सेल डीड
  • आधार कार्ड
  • बंटवारा कागज
  • कोर्ट आदेश (यदि कोई हो)

गलती न हो, इसलिए बाउंड्री खुद बताना जरूरी है।

सीमा विवाद मिटेंगे और सर्वे तेजी से होगा।

किसी गलती को तुरंत सुधाराया जा सकता है।

भविष्य के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

कौन-सी जमीन किसके नाम है — यह साफ दिख जाएगा।

जमीन सर्वे से होने वाले फायदे

  • विवाद कम
  • पुराना रिकॉर्ड अपडेट
  • डिजिटल नक्शा उपलब्ध
  • लोन लेने में आसानी
  • जमीन खरीद-फरोख्त सुरक्षित
  • म्यूटेशन आसान
  • भू-माफिया की मनमानी खत्म

बिहार में सर्वे 2027 तक क्यों बढ़ाया गया?

  • 37,384 नए गांवों में सर्वे शुरू हुआ
  • सर्वे कार्य का 25% अभी बाकी
  • 14,000 नए कर्मचारी लगाए जा रहे हैं
  • Self-Declaration और फील्ड सर्वे में देरी
  • ग्रामीण क्षेत्रों में भारी कार्यभार

इन्हीं कारणों से नई सरकार ने अवधि 2027 तक बढ़ा दी है

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