विराट रामायण मंदिर | दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग का रहस्य जान चौंक जाएंगे आप:-भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक धरोहरों की भूमि कहा जाता है, लेकिन बिहार के कैथवलिया (पूर्वी चंपारण) में बना विराट रामायण मंदिर और उसमें स्थापित दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अब पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, वास्तुकला, विज्ञान और श्रद्धा का अद्भुत संगम है।
इस लेख में हम जानेंगे—
- विराट रामायण मंदिर क्या है
- दुनिया का सबसे ऊँचा/भारी शिवलिंग क्यों खास है
- शिवलिंग से जुड़ा रहस्य
- निर्माण से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य
- दर्शन व्यवस्था और भविष्य की योजनाएँ
विराट रामायण मंदिर क्या है?
विराट रामायण मंदिर बिहार के कैथवलिया गाँव (पूर्वी चंपारण) में बन रहा एक भव्य धार्मिक परिसर है।
पूरा मंदिर परिसर 120–161 एकड़ में फैला है और निर्माण पूरा होने के बाद इसे दुनिया के सबसे विशाल मंदिर परिसरों में गिना जाएगा।
मान्यता है कि इसका स्वरूप इतना विराट होगा कि यह अंकोरवाट (कंबोडिया) से भी बड़ा धार्मिक परिसर बनेगा।
विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग
कैथवलिया में 7 तीर्थों के पवित्र जल से अभिषेक और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा के बीच शिवलिंग को गर्भगृह में किया गया स्थापित
विराट मंदिर में विराजे शिव
कैथवलिया में शनिवार को सनातन परंपरा का ऐतिहासिक क्षण साकार हुआ। विराट रामायण मंदिर के गर्भगृह में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग (33 फीट) की स्थापना की गई। आगम व वैदिक विधि से 21 विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच महादेव विराजमान हुए। हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। भोपाल से आए दो बड़े क्रेन की मदद से शिवलिंग को स्थापित किया गया। इससे पहले काशी, अयोध्या और पटना हनुमान मंदिर के पंडितों ने विभिन्न नदियों से लाए गए पवित्र जल से अभिषेक कराया।
64 देवताओं की बेदी पूजा, 1008 शिवलिंग का आह्वान और महाबलीपुरम से आए तांबे व सोने के यंत्र की विधिवत पूजा के बाद न सहस्त्रलिंगम को स्थापित किया गया। पूरी प्रक्रिया करीब 20 मिनट न में संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक पल के र साक्षी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी र सीएम सम्राट चौधरी, विजय कुमार न सिन्हा और विजय कुमार चौधरी है बने। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे व हेलिकॉप्टर से पहुंचे और शिवलिंग ने का दर्शन किया। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मंदिर निर्माण और शिवलिंग की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने पूजा मंडप में फूल अर्पित कर बिहार की उन्नति की कामना की। डीजीपी विनय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम । किए गए थे।
सीएम ने फूल अर्पित कर बिहार की उन्नति की कामना की
मंदिर…
- ऊंचाई 270 फीट
- चौड़ाई 540 फीट
- लंबाई 1080 फीट
- क्षेत्रफल 120 एकड़
- मंदिर 22
- शिखर 12
- सबसे ऊंचा शिखर- 270 फीट
शिवलिंग…
- ऊंचाई 33 फीट
- गोलाई 33 फीट
- वजन 210 एमटी
- 2 बड़े क्रेन भोपाल से आए। उनकी मदद से शिवलिंग को मंदिर के पीठ पर स्थापित किया गया।
7 नदियों का पवित्र जल, 500 संत
कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री का जल यज्ञशाला में रखा गया। अयोध्या के राजकुमार अपनी टीम के साथ सरयू का जल लेकर पहुंचे। 500 से अधिक साधु-संत इस मौके पर मौजूद रहे।
शांभवी व सायन मुख्य यजमान
पूजा में मंदिर संस्थापक स्व. किशोर कुणाल के पुत्र सायन कुणाल और पुत्रवधु, सांसद शांभवी चौधरी मुख्य यजमान बने। आचार्य भवनाथ झा के नेतृत्व में पूजा संपन्न हुई।
- विराट रामायण मंदिर क्यों खास है?
- गर्भगृह में 10 हजार श्रद्धालु जलाभिषेक कर सकेंगे।
- निर्माण पूरा होने पर यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा और अंकोरवाट से भी विशाल माना जाएगा।
गिनीज बुक में दर्ज कराने की प्रक्रिया क्या है? - बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड मंदिर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद बाद गिनीज बुक को अनुशंसा भेजेगा।
गर्भगृह की क्षमता कितनी होगी ?
मंत्रोच्चार से गूंजा कैथवलिया
शनिवार को कैथवलिया गांव में जश्न का माहौल रहा। सुबह 5 बजे से मंगल गीत गूंजने लगे। महिलाएं, पुरुष और बच्चे मंदिर की ओर बढ़ते दिखे। सुबह 8 बजे यज्ञ मंडप में पूजा शुरू हुई। मंत्रोच्चार की ध्वनि 20 किमी तक सुनाई दी। कई जगह लाइव प्रसारण हुआ। 10 बजे क्रेन से शिवलिंग उठाया गया। 11:50 बजे मुख्य सचिव और डीजीपी का हेलिकॉप्टर उतरा। 12 बजे मुख्यमंत्री पहुंचे। दोपहर 3 बजे हेलिकॉप्टर से शिवलिंग पर पुष्पवर्षा हुई।
शिव के शिखर पर सबकी नजर, दर्शन के लिए लगी आठ किमी लंबी कतार
पूर्वी चंपारण के कैथवलिया में 33 फुट ऊंचे विश्व के सबसे बड़े सहस्रलिंगम की विधिवत स्थापना के साथ ही पूरा क्षेत्र ‘ॐ नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा. इस अलौकिक अवसर पर सीएम नीतीश कुमार भी दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे. इस दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.
11 साल में हुआ तैयार 210 टन का सहस्त्र शिवलिंगम
विराट रामायण मंदिर की विशेषताएं
- विश्व का सबसे बड़ा मंदिर
- यह मंदिर 120-161 एकड़ के में फैला हुआ है और पूरा होने पर यह कंबोडिया के “अंकोरवाट” से भी बड़ा धार्मिक परिसर होगा.
- विशाल ऊंचाई व आकार-
- मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट है. इसकी लंबाई 1080 फुट व चौड़ाई 540 फुट है.
- दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग –
- मंदिर में 33 फुट ऊंचा व 210 टन वजनी “सहस्त्रलिंगम” स्थापित किया गया है. ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लाया गया है.
- वास्तुकला का मिश्रण –
- इसकी बनावट में दक्षिण भारतीय (रामेश्वरम और मीनाक्षी मंदिर) व दक्षिण-पूर्व एशिया (अंकोरवाट) शैलियों में हो रहा है.
स्थापित किये गये शिवलिंग को देखते सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा व अन्य.
शिवलिंग पर हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा
स्थापना पूर्ण होते ही सहस्रलिंगम पर शनिवार को करीब तीन बजे हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गयी, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया. आसमान से रंग-बिरंगे फूलों की बरसात शुरू हो गयी. श्रद्धालु जय भोलेनाथ के जयकारे लगाने लगे.
दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग: क्या है इसकी खासियत?
विराट रामायण मंदिर में स्थापित शिवलिंग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, क्योंकि—
शिवलिंग के रिकॉर्ड तोड़ तथ्य
- ऊँचाई: 33 फीट
- वजन: लगभग 210 टन
- निर्माण सामग्री: ग्रेनाइट स्टोन
- दर्जा: दुनिया का सबसे बड़ा स्थापित सहस्त्र शिवलिंग
यह शिवलिंग केवल आकार में ही नहीं, बल्कि धार्मिक और तकनीकी दृष्टि से भी अद्वितीय है।
दर्शन करने से क्या मान्यता जुड़ी है?
मान्यताओं के अनुसार—
- सहस्त्र शिवलिंग के दर्शन से
- सभी पापों का क्षय
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
कई श्रद्धालु इसे “कलियुग का महादेव चमत्कार” भी कह रहे हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
विराट रामायण मंदिर और उसमें स्थापित दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग—
- केवल एक संरचना नहीं
- बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है
यदि आप आस्था, रहस्य और भव्यता में विश्वास रखते हैं, तो यह स्थान निश्चित ही आपको चौंका देगा और आध्यात्मिक रूप से जोड़ देगा।
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