स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर अब नहीं लगेगा ब्याज | जल्दी करें आवेदन | 4 लाख मिलेगा:-स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत दिए जाने वाले शिक्षा ऋण की राशि अब सभी आवेदकों के लिए ब्याज रहित होगी।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शिक्षा ऋण अब मिलेगा ब्याज मुक्त
सात निश्चय योजना के तहत 12 वीं पास विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बिहार स्टूडेंट कार्ड योजना के माध्यम से मिलने वाले चार लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण को राज्य सरकार ने ब्याज मुक्त कर दिया है। वहीं दो लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण राशि को चुकाने की अवधि को भी विस्तारित किया गया। अब पांच वापस किया जा सकेगा। अधिकतम 10 वर्षों में भी वापस कर सकेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने एक्स हैंडल पर सरकार के इस निर्णय की जानकारी दी।
अभी इस तरह के व्याज पर मिल रहा था शिक्षा ऋण
वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत चार लाख का शिक्षा ऋण सामान्य आवेदक को चार प्रतिशत तथा महिला, दिव्यांग व ट्रांसजेंडर को एक प्रतिशत के ब्याज पर दिया जा रहा। बिहार सरकार ने सात निश्चय योजना के अंतर्गत 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी को उच्च शिक्षा व प्रोफेशनल पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए दो अक्टूबर 2016 को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लागू किया था।
मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि दो लाख तक के शिक्षा ऋण को अब तक 60 मासिक किस्तों यानी पांच वर्षों में वापस करने का प्रविधान था, जिसे बढ़ाकर 84 मासिक किस्त यानी सात वर्ष कर दिया गया है। अधिकतम 10 वर्षों यानी 120 मासिक किस्त में वापसी भी संभव हो सकेगी।
2025-26 में 1.27 लाख को लाभ दिए जाने का लक्ष्य
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.27 छात्र-छात्राओं को शिक्षा ऋण राशि दिए जाने का लक्ष्य है। इसके लिए सरकार ने 300 करोड़ आवंटित किए हैं। ऋण का भुगतान पाठ्यक्रम पूरा करने के एक वर्ष बाद आरंभ होता है।
तकनीकी शिक्षा के लिए 63 प्रतिशत ने लिया ऋण
तकनीकी शिक्षा के लिए सबसे अधिक 63 प्रतिशत विद्यार्थियों ने योजना के तहत शिक्षा ऋण लिया है। इनमें ग्रामीण इलाके के विद्यार्थियों की संख्या 91.99 प्रतिशत है।
ऋण के लिए पात्रता
आवेदक की न्यूनतम उम्र 18 तथा अधिकतम उम्र 25 वर्ष निर्धारित है। अधिकतम उम्र सीमा को 30 वर्ष कर दिया गया है। महिलाओं तथा एसी-एसटी आवेदक की अधिकतम उम्र सीमा 33 वर्ष है। आवेदक को बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
दो लाख तक की ऋण राशि अब पांच की जगह सात वर्षों में लौटाने का प्रविधान
- मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर इस निर्णय की दी जानकारी
- अधिकतम 10 वर्षों में भी वापस कर सकेंगे ऋण की राशि
- वर्ष 2016 के दो अक्टूबर से लागू है यह योजना
हमलोगों का उद्देश्य है कि राज्य के अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। शिक्षा ऋण में दी जाने वाली इन सुविधाओं से छात्रों के मनोबल में वृद्धि होगी। वे अधिक उत्साह एवं लगन से उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य के साथ-साथ राज्य एवं देश का भविष्य भी संवार सकेंगे। नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री
इस योजना के तहत लाखों विद्यार्थियों को मिल रहा लाभ
| वर्ष | लाभान्वित विद्यार्थी |
| 2024-25 | 80,236 |
| 2023-24 | 69,459 |
| 2022-23 | 26,293 |
| 2020-21 | 22778 |
पौने चार लाख विद्यार्थियों को मिल चुका है लाभ
फरवरी 2025 तक राज्य के 3 लाख 69 हजार 162 छात्र-छात्राओं को विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के लिए 10 हजार 920 करोड़ 65 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। इसमें 4746 करोड़ की राशि दी जा है। मान्यता प्राप्त सरकारी और निजी संस्थानों में नामांकित बिहार के छात्र छात्राओं को कॉलेज फीस के लिए शिक्षा ऋण देने का प्रावधान है। छात्र-छात्राओं को संबंधित कोर्स का शिक्षण शुल्क, लैपटॉप और हॉस्टल में रहने का खर्च सहित अधिकतम 4 लाख रुपए ऋण दिया जाता है। छात्रों को 4 प्रतिशत ब्याज और छात्राओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग छात्र-छात्राओं को एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने का प्रावधान किया गया था।
पाठ्यक्रमों के लिए योजना
बीए, बीएससी, बीकॉम (सभी विषयों के लिए), एमए, एमएससी और एम कॉम (सभी विषयों के लिए), आलिम, शास्त्री, बीसीए, एमसीए,बीबीए, बीएससी (कृषि), इंजीनियरिंग, मेडिकल, होटल मैनेजमेंट, बीएससी (पुस्तकालय विज्ञान), बीएसससी (सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग, कंप्यूटर विज्ञान), राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित डिप्लोमा पाठ्यक्रम, योग में स्नातक, बीएससी नर्सिंग, फार्मेसी, पशु चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा स्नातक (बीवीएमएस), आयुर्वेद चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा स्नातक (बीएएमएस),
यूनानी चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा स्नातक (बीयूएमएस), होम्योपैथिक मेडिसिन एवं सर्जनी में स्नातक (बीएचएमएस), बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (बीडीएस), सामान्य नर्सिंग मिडवाइफरी (जीएनएम), फिजियोथेरेपी में स्नातक, व्यावसायिक चिकित्सा में स्नातक, खाद्य पोषण या आहार विज्ञान में डिप्लोमा, पत्रकारिता, फैशन टेक्नोलॉजी, परिधान डिजाइनिंग, फुटवियर डिजाइनिंग, वास्तुकला स्नातक, शारीरिक शिक्षा स्नातक (बीपीएड), एमएससी, एमटेक एकीकृत पाठ्यक्रम, ललित कला स्नातक, बैचलर इन लॉ और एलएलबी पायलट प्रशिक्षण आदि
2 अक्टूबर 2016 में शुरू हुई थी योजना
राज्य के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिए शिक्षा ऋण देने की योजना 2 अक्टूबर 2016 में शुरू हुई थी। तब से राशि में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। शुरुआत में राज्य सरकार गारंटर बन कर बैंकों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को शिक्षा ऋण दिलाती थी। लेकिन बैंकों से शिक्षा ऋण मिलने में आनाकानी और परेशानी के बाद राज्य सरकार ने शिक्षा वित्त निगम बना कर शिक्षा ऋण देना तय किया। 27 मार्च 2018 के बाद शिक्षा वित्त निगम से छात्र-छात्राओं को शिक्षा ऋण दिया जा रहा है।
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