स्नातक में दो या चार सेमेस्टर के बाद पढाई छोडने पर मिलेगा डिग्री:-पटना यूनिवर्सिटी (Patliputra University – PPU) ने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत बड़ा फैसला लिया है। अब स्नातक (Graduation) के छात्र चाहें तो दो या चार सेमेस्टर पूरा करने के बाद ही कोर्स छोड़कर भी प्रमाणपत्र (Certificate) या डिप्लोमा (Diploma) प्राप्त कर सकेंगे।
इसके साथ ही 5वें सेमेस्टर में इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी गई है।
इस फैसले से क्या बदलेगा?
नई शिक्षा नीति का मकसद विद्यार्थियों को लचीला (Flexible) शिक्षा मॉडल देना है। इसी के तहत पीपीयू ने एक्जिट ऑप्शन की अनुमति दी है।
पीपीयू : स्नातक में दो या चार सेमेस्टर के बाद छोड़ सकेंगे कोर्स, पांचवें सेमेस्टर में इंटर्नशिप अनिवार्य
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में स्नातक में दो या चार सेमेस्टर के बाद कोर्स को छोड़ सकेंगे उन्हें उतना क्रेडिट दे दिया जाएगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के एग्जिट ऑप्शन को विवि सिंडिकेट की बैठक में स्वीकृति दे दी गई।
यूनिवर्सिटी ने एनईपी के एग्जिट ऑप्शन को दी स्वीकृति
साथ ही सेमेस्टर में इंटर्नशिप को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त एईडीपी के तहत कोर्स खोलने, बोर्ड ऑफ स्टडीज, पीएमआईआर को रेगुलर मोड में चलाने को भी स्वीकृति दे दी गई। दो कॉलेजों में एलएलएम समेत 8 कॉलेजों में वोकेशनल कोर्स में स्वीकृति प्रदान की गयी है। तीन विषयों संस्कृत, पाली व मैथिली विभाग खोलने को स्वीकृति मिली है|
सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एवं नवनियुक्त प्राचायों की नियुक्ति का अनुमोदन
इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा छः विषयों में अनुशंसित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एवं नवनियुक्त प्राचार्यों की नियुक्ति का अनुमोदन प्राप्त हुआ। शिक्षकेतर कर्मचारियों के उच्चतर पदभार देने के लिए प्रोत्रति समिति की अनुशंसा को भी अनुमोदित किया गया। बैठक में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में सदस्य प्रो राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, अरूण कुमार, प्रतिभा सिंह, प्रो नरेन्द्र सिंह उपस्थित थे।
पीएचडी कोर्स वर्क की फीस बढ़ेगी, कोर्स सिलेबस भी बदलेगा
कुलपति प्रो उपेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई सिंडिकेट बैठक में 22वीं एवं 23वीं वित्त समिति, 20वीं एएनटीपीसी, 17वीं विद्वत परिषद के ज्यादातर प्रस्तावों को अभिषद के सदस्यों द्वारा अनुमोदित किया गया। पीएचडी कोर्स वर्क के लिए फीस वृद्धि के प्रस्ताव को भी पारित कर दिया। इसके अतिरिक्त पीएचडी कोर्स वर्क के विभिन्न विषयों के सिलेबस को अपडेट कर बदलाव किया गया है।
मैथिली, होम साइंस, पर्शियन, मनोविज्ञान, केमेस्ट्री व प्राकृत विषयों के सिलेबस को भी अपडेट किया जायेगा। इसके अतिरिक्त कई कॉलेजों में जिन विषयों में स्नातक की पढ़ाई हो रही है, वहां पीजी विषय की भी पढ़ाई को स्वीकृति प्रदान की गयी है। आगे जो प्रस्ताव आयेंगे उन्हें भी राज्य सरकार के निर्देशानुसार स्वीकृति प्रदान की जायेगी। सारे प्रस्ताव राजभवन व राज्य सरकार में भी अनुमोदन के लिए जाएंगे। वहां से स्वीकृति के बाद इसे विवि में पूर्णतः लागू कर दिया जाएगा। बाद में सीनेट की बैठक में इन सबका अनुमोदन होगा
बीसीए कोर्स में गणित की अनिवार्यता समाप्त
स्नातक कंप्यूटर कंप्यूटर (बीसीए) कोर्स में अब गणित विषय की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। विवि के सिंडिकेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अब स्नातक उत्तीर्ण कोई भी छात्र नामांकन ले सकेंगे। स्टूडेंट्स वेलफेयर डीन प्रो राजीव रंजन ने बताया कि पहले एकेडमिक काउंसिल में चर्चा के बाद यह प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया था लेकिन बाद में कॉलेजों के द्वारा जब ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के नये नियमों की कॉपी पेश की तो फिर सिंडिकेट में उक्त प्रस्ताव को विचार के बाद स्वीकृत कर दिया गया।
स्नातक में एग्जिट ऑप्शन: क्या मिलेगा?
| सेमेस्टर पूरा | मिलने वाला सर्टिफिकेट |
|---|---|
| 1 वर्ष (2 सेमेस्टर) | सर्टिफिकेट कोर्स |
| 2 वर्ष (4 सेमेस्टर) | डिप्लोमा कोर्स |
| 3 वर्ष (6 सेमेस्टर / पूरा कोर्स) | स्नातक (Graduate) डिग्री |
| 4 वर्ष (8 सेमेस्टर) | Honours with Research Degree |
इसका मतलब यह है कि अगर किसी कारण से छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ना चाहते हैं, तो उनकी पढ़ाई बेकार नहीं जाएगी।
5वें सेमेस्टर में इंटर्नशिप अनिवार्य
बैचलर डिग्री में अब प्पीयू ने तय किया है कि:
- 5वें सेमेस्टर में 100 घंटे की इंटर्नशिप करना जरूरी होगा।
- छात्र इसे किसी निजी कंपनी, सरकारी संस्थान, NGO या इंडस्ट्री में कर सकते हैं।
- इंटर्नशिप का मूल्यांकन भी अंतिम परिणाम में जोड़ा जाएगा।
बीएससी कोर्स में गणित की अनिवार्यता समाप्त
बैठक में फैसला लिया गया कि:
- B.Sc (साइंस) में गणित की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
अब छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुन सकेंगे।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों को क्या लाभ?
- पढ़ाई बीच में रुकने पर भी कोई वर्ष बर्बाद नहीं होगा
- छात्र आगे कभी भी चाहें तो वापस एडमिशन लेकर अगले सेमेस्टर से शुरू कर सकते हैं
- रोजगार के लिए इंटर्नशिप का बड़ा फायदा मिलेगा
- विषय चयन में अधिक स्वतंत्रता
निष्कर्ष
पटना यूनिवर्सिटी का यह फैसला विद्यार्थियों के लिए बेहद फायदेमंद है। नई शिक्षा नीति के अनुसार अब शिक्षा अधिक लचीली, व्यावहारिक और रोजगार-उन्मुख बन रही है। स्नातक में दो या चार सेमेस्टर के बाद भी प्रमाणपत्र/डिप्लोमा मिलने से छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।
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