राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक और पीजी का सिलेबस बदलेगा- राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक और पीजी का सिलेबस बदलेगा। इसमें इंडियन नॉलेज सिस्टम और रिसर्च पर ज्यादा फोकस होगा। लोकभवन ने इसके लिए पांच कुलपतियों और अपने एक ओएसडी की कमेटी बनाई है। राज्यपाल के प्रधान सचिव आरएल चोंग्थू ने इसकी अधिसूचना जारी की है। हालांकि सिलेबस तैयार करने को लेकर कोई तिथि तय नहीं है। अभी ज्यादातर विवि में पीजी का सत्र 2025-27 और स्नातक में सत्र 2025-29 शुरू हो चुका है। बदला हुआ सिलेबस पीजी के सत्र 2026-28 और स्नातक के सत्र 2026-30 से लागू होगा।
राज्य के सभी विवि में स्नातक और पीजी का सिलेबस बदलेगा
सिलेबस में बदलाव एनईपी के तहत होगा। हालांकि एनईपी 2020 से ही लागू है। लेकिन इसमें जो प्रावधान हैं वे अब तक विश्वविद्यालयों में हू-ब-हू लागू नहीं हो पाए हैं या लागू ही नहीं हुए हैं। स्नातक के तीन वर्षीय ओल्ड कोर्स को बदलकर च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत सेमेस्टर । फॉर्मेट में चार साल का कर दिया गया। जबकि पीजी का कोर्स काफी पहले से दो र साल के वार्षिक कोर्स की जगह सेमेस्टर स्तरीय कर दिया गया। अब इनमें एनईपी के प्रावधान शामिल कर उसके अनुसार 3 सिलेबस तैयार किया जाएगा।
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जरूरत क्यों ?
चार वर्षीय स्नातक कोर्स जब लागू हुआ था, तब यूजीसी से जारी विषयों के बास्केट को लोकभवन ने राज्य के विवि के लिए स्वीकृत किया था। ऑनर्स को मेजर कोर्स (एमजेसी), सब्सिडियरी को माइनर कोर्स देते हुए चार और कोर्स मल्टीडिस्पिलनरी कोर्स, वैल्यू एडेड कोर्स, स्किल इनहांसमेंट कोर्स और एबिलिटी इनहांसमेंट कोर्स (एईसी) शुरू किए गए। सभी कोर्स के बास्केट में अलग-अलग पेपर शामिल हैं। लेकिन विवि संसाधन की उपलब्धता के अनुसार अपने हिसाब से पेपर को लागू कर रहे हैं।
फायदा क्या?
छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का मौका मिलेगा। साथ ही, स्थानीय भाषा में पढ़ने का मौका मिलेगा। अभी जो संसाधन उपलब्ध हैं उनके ही आधार पर सिलेबस तैयार किया जाएगा और छात्रों को इसी सिलेबस के आधार पर स्नातक और पीजी की पढ़ाई करनी होगी। पीजी करने वाले छात्रों को रिसर्च पर ज्यादा काम करना होगा। कुछ विषयों में दो साल तक रिसर्च करने का मौका मिल सकता है। ऐसे विषयों में छात्रों को पीजी की पढ़ाई भी दो साल करनी होगी।
कमेटी में ये हैं शामिल
कमेटी में जेपीयू छपरा के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार वाजपेयी, एलएनएमयू दरभंगा के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी, बीएनएमयू बीएनएमयू के के कुलपति कुलपति पति प्रा. प्रो. बिमलदु बिमलेंदु शेखर झा, एकेयू के कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव, के केएसडीएसयू दरभंगा के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय और लोकभवन की ओएसडी कल्पना श्रीवास्तव शामिल हैं।
किन सत्रों से लागू होगा नया सिलेबस?
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});| कोर्स | वर्तमान सत्र | नया सिलेबस लागू |
| स्नातक (UG) | 2025–29 | 2026–30 |
| स्नातकोत्तर (PG) | 2025–27 | 2026–28 |
मतलब साफ है कि वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों का सिलेबस नहीं बदलेगा, बदलाव नए सत्र से नामांकन लेने वाले छात्रों पर लागू होगा।
सिलेबस बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
जब चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू किया गया था, तब UGC द्वारा जारी विषयों के बास्केट को राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों के लिए स्वीकृत किया था। इसके तहत:
- ऑनर्स – मेजर कोर्स (MJC)
- सब्सिडियरी – माइनर कोर्स
- साथ में जोड़े गए: मल्टीडिसिप्लिनरी कोर्स, वैल्यू एडेड कोर्स, स्किल इनहांसमेंट कोर्स, एबिलिटी इनहांसमेंट कोर्स (AEC)
लेकिन समस्या यह रही कि विश्वविद्यालय अपने संसाधनों के अनुसार अलग-अलग पेपर लागू कर रहे हैं, जिससे सिलेबस में एकरूपता नहीं रह गई। इसी कमी को दूर करने के लिए सिलेबस में बदलाव जरूरी समझा गया।
एनईपी में बदलाव होगा… मगर यह मुख्य रूप से रिसर्च वर्क को लेकर
एनईपी में बदलाव होगा एनईपी पहले से लागू है लेकिन इसमें अब कुछ बदलाव होना है। ये बदलाव मुख्य रूप से रिसर्च वर्क को लेकर होंगे। कुछ विषयों में पीजी एक तो कुछ में दो वर्ष का होना है। इंडियन नॉलेज सिस्टम की चीजें भी जोड़ी जाएंगी। सिलेबस में एकरूपता लाई जाएगी। इससे एनईपी के प्रावधान राज्य के सभी विवि में एक समान रूप में लागू हो सकेंगे।
हर सेमेस्टर में परीक्षा छोड़ रहे 10 हजार छात्र
बीआरएबीयू में स्नातक के हर सेमेस्टर में औसतन 10 हजार विद्यार्थी परीक्षा छोड़ रहे हैं। परीक्षा विभाग द्वारा परीक्षा फार्म भराने के आंकड़े की रिपोर्ट से यह बात सामने आयी है। स्नातक प्रथम सेमेस्टर सत्र 2025-29 में भी 13 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है। शिक्षकों का कहना है कि सीबीसीएस में कई विषय के शिक्षक नहीं हैं।.
सीबीसीएस में घटती छात्र भागीदारी
पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रो. मनोज कुमार का कहना है कि छात्रों को वार्षिक परीक्षा देने की आदत है। कक्षा में छात्र नियमित नहीं आ रहे हैं, नियमित नहीं आने से वह पढ़ाई को समझ नहीं पा रहे हैं। विवि में स्नातक में हर साल डेढ़ लाख छात्रों का दाखिला होता है, लेकिन परीक्षा 1 लाख 40 हजार या 1 लाख 42 हजार के आसपास छात्र ही देते हैं। सीबीसीएस के तहत छात्रों को मासिक टेस्ट और असाइमेंट जमा करना पड़ता है, इसलिए छात्रों की संख्या कम हो रही है। इसमें सुधार के लिए छात्रों को कक्षा करने और परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
परीक्षा छोड़ने के पीछे कई कारण
परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार का कहना है कि कई बच्चे प्रतियोगी परीक्षा दे रहे हैं, इस कारण परीक्षा छोड़ रहे हैं। कुछ बच्चे आर्थिक कमजोरी के कारण पलायन कर जा रहे हैं। विविमें अपार आईडी बन रहा है। इसकी पूरी ट्रैकिंग की जायेगी। बीआरएबीयू में सत्र देर होने से कई छात्र दूसरे विवि में चले जा रहे हैं। इस कारण ये परीक्षा में शामिल नहीं हो रहे हैं। सिलेबस पूरा नहीं होने के कारण भी छात्र परीक्षा छोड़ रहे हैं। स्नातक से लेकर पीजी तक कई विषयों का सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा है।
EXAM नियंत्रक ने किया निरीक्षण
प्रो. राम कुमार परीक्षा नियंत्रक ने सोमवार को वैशाली जिले में स्नातक परीक्षा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में कई केंद्रों पर परीक्षार्थी एक दम आसपास बैठकर परीक्षा देते मिले। इसपर परीक्षा नियंत्रक ने केंद्राधीक्षकों को सख्त हिदायत दी। उन्होंने छात्रों को दूर-दूर बैठाने को कहा। उन्होंने वीक्षकों को अपने सामने ओएमआर शीट पर रोल नंबर और कॉपी कोड भराने का निर्देश दिया। परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले छात्रों की पूरी जांच का निर्देश दिया।
तीन साल से रिजल्ट सुधार को दौड़ रही छात्रा
बीआरएबीयू की एक छात्रा तीन साल से अपने रिजल्ट सुधार के लिए दौड़ रही है। छात्रा सोमवार को फिर विवि के गेस्ट हाउस में आयोजित छात्र संवाद में पहुंची और डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अमर बहादुर शुक्ला और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक डॉ. रेणुबाला को अपनी परेशानी बताई। छात्रा प्रीति कुमारी ने कहा कि उसने सत्र 2021-23 में पीजी में नामांकन कराया था। एलएस कॉलेज में इतिहास विषय में दाखिला लिया था। परीक्षा में उसे 17 नंबर आये, लेकिन जब उसने आरटीआई से कॉपी निकलवाई तो नंबर 41 थे। डिप्टी कंट्रोलर ने जल्द रिजल्ट सुधारवाने का आश्वासन दिया।
सिलेबस बदलाव को लेकर क्या है आधिकारिक फैसला?
राज्यपाल के प्रधान सचिव आर.एल. चोंग्थू ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इसके तहत सिलेबस तैयार करने के लिए पांच कुलपतियों और लोकभवन के एक ओएसडी की एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है।
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});हालांकि, अभी तक सिलेबस तैयार करने की कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गई है, लेकिन साफ कर दिया गया है कि मौजूदा सत्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
छात्रों को क्या फायदा होगा?
- भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव
- रिसर्च-ओरिएंटेड एजुकेशन
- स्किल-आधारित और रोजगारोन्मुख पढ़ाई
- एकरूप सिलेबस से प्रतियोगी परीक्षाओं में सहूलियत
- अकादमिक क्वालिटी में सुधार
फायदा क्या?
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्रों को मदद मिलेगी
- छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय विषयों से जुड़ने का अवसर मिलेगा
- स्नातक और पीजी स्तर पर रिसर्च पर ज्यादा फोकस होगा
- राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एक जैसा सिलेबस लागू होगा
- पढ़ाई अधिक स्किल और रोजगारोन्मुख बनेगी
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