बिहार के सभी यूनिवर्सिटी का स्नातक का शैक्षणिक कैलेंडर जारी- बिहार के सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों में एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू हो गया है। लोकभवन ने शनिवार को स्नातक पाठ्यक्रम में एकरूप शैक्षणिक कैलेंडर जारी करते हुए इसकी जानकारी सभी विश्वविद्यालयों को भेज दी। राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन ने सभी विश्वविद्यालयों के लिए इसे अक्षरशः लागू करने का निर्देश दिया है।
शैक्षणिक कैलेंडर में पहले से लेकर आठवें सेमेस्टर तक नामांकन से लेकर परीक्षा और रिजल्ट तक की तिथि तय कर दी गई है। लोकभवन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी सूरत में इस शैक्षणिक कैलेंडर का विचलन स्वीकार्य नहीं होगा। इसका अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही शैक्षणिक कैलेंडर में अधिकतम सात दिनों का विचलन किया जा सकेगा।
राज्यपाल सचिवालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बिहार के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों में एकरूपता और अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने का निदेश दिया है। सभी कुलपतियों को निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि शिक्षण, परीक्षा, मूल्यांकन एवं परिणाम प्रकाशन जैसी प्रक्रियाएं समयबद्ध एवं समन्वित रूप से संचालित हो सकें।
जुलाई से दिसंबर: सेमेस्टर एक
- नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ व रजिस्ट्रेशनः 01 मई
- नामांकन व रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया : 30 जून तक
- पढ़ाई प्रारंभ : 1 जुलाई से
- मध्य सेमेस्टर परीक्षा : 11 से 16 सितंबर
- एडमिट कार्ड जारीः 20 नवंबर
- क्लास खत्म: 20 नवंबर
- प्रायोगिक परीक्षाः 20 से 26 नवंबर
- सेमेस्टर अंत परीक्षाः 27 नवंबर से 16 दिसंबर
- परीक्षाफल का प्रकाशन: 10 जनवरी
सेमेस्टर तीन, पांच व सातः जुलाई से दिसंबर
- नामांकन प्रक्रियाः 20 से 30 जून
- पढ़ाई प्रारंभः 1 जुलाई से
- मध्य सेमेस्टर परीक्षाः 11 से 16 सितंबर
- एडमिट कार्ड जारीः 20 नवंबर
- क्लास पूरा 20 नवंबर
- प्रायोगिक परीक्षाः 20 से 26 नवंबर
- सेमेस्टर अंत परीक्षाः 27 नवंबर से 16 दिसंबर
- परीक्षाफल का प्रकाशनः 10 जनवरी
सेमेस्टर दो, चार, छह और आठः जनवरी से जून
- नामांकन प्रक्रिया: 04 से 09 जनवरी
- पढ़ाई प्रारंभः 04 जनवरी से
- मध्य सेमेस्टर परीक्षा: 15 से 20 मार्च
- क्लास पूराः 30 अप्रैल
- एडमिट कार्ड जारी करना: 30 अप्रैल
- प्रायोगिक परीक्षा : 01 से 06 मई
- सैद्धांतिक परीक्षाः 06 से 24 मई
- परीक्षाफल का प्रकाशनः 20 जून
विश्वविद्यालयों में स्नातक का समान शैक्षिक कैलेंडर लागू
छात्रहित में लिया गया निर्णयः इस समय एक-दो विश्वविद्यालयों को छोड़कर अन्य सभी विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र विलंब से संचालित हो रहा है। कई स्थानों पर तो तीन साल का सत्र चार-पांच साल तक विलंबित होता रहा है। समय पर डिग्री नहीं मिलने से विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने में कठिनाई होती है। प्रतियोगिता परीक्षा में वे समय पर शामिल नहीं हो पाते हैं। अब आगामी सत्रों से शैक्षणिक कैलेंडर लागू होने से सभी विवि में पढ़ाई से परीक्षा तक एकरूपता बनी रहेगी।
30 जून तक नामांकन पहली जुलाई से कक्षाएं
लोकभवन के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पहले सेमेस्टर के लिए हर हाल में पहली जुलाई से विश्वविद्यालयों में पढ़ाई शुरू कर लेनी है। इसके पहले 30 जून तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी। पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर के लिए एक कैलेंडर है, जबकि दूसरे, चौथे, छठे और आठवें सेमेस्टर के लिए अलग कैलेंडर जारी किया गया है। पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर में पहली जुलाई से जबकि दूसरे, चौथे, छठे और आठवें सेमेस्टर में चार जनवरी से पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
क्यों लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय?
बिहार के अधिकांश विश्वविद्यालयों में वर्षों से सत्र विलंब की समस्या बनी हुई थी। कई बार छात्रों को तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने में चार से पांच वर्ष तक का समय लग जाता था। इसके कारण छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं, नौकरी के आवेदन और उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
राजभवन ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित करना है।
30 जून तक पूरा होगा नामांकन
जारी शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार प्रथम, तृतीय, पंचम एवं सप्तम सेमेस्टर के विद्यार्थियों का नामांकन प्रत्येक वर्ष 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 1 जुलाई से नियमित कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था से नए विद्यार्थियों को समय पर कॉलेज में प्रवेश मिलेगा और सत्र की शुरुआत निर्धारित समय पर हो सकेगी।
1 जुलाई से शुरू होंगी कक्षाएं
नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर की पढ़ाई 1 जुलाई से शुरू होगी। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित तिथि से नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही छात्रों की उपस्थिति, आंतरिक मूल्यांकन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
तीन वर्षीय और चार वर्षीय दोनों पाठ्यक्रमों पर लागू होगा कैलेंडर
यह नया शैक्षणिक कैलेंडर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में संचालित तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUGP) दोनों पर लागू होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बिहार के विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम लागू किया गया है। इसलिए छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे राज्य में एक समान व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है।
किसी यूनिवर्सिटी पर होगा लागू
बिहार के सभी पारंपरिक (Traditional) विश्वविद्यालयों में लागू होगा। राज्यपाल सह कुलाधिपति द्वारा जारी निर्देश के अनुसार स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों के लिए एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू किया गया है। इसमें प्रमुख विश्वविद्यालय शामिल हैं:
- Patliputra University
- Patna University
- Magadh University
- Veer Kunwar Singh University
- Lalit Narayan Mithila University
- Babasaheb Bhimrao Ambedkar Bihar University
- Tilka Manjhi Bhagalpur University
- Munger University
- Purnea University
- Jai Prakash University
- Bhim Rao Ambedkar Bihar University
राजभवन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जुलाई 2026 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र में सभी विश्वविद्यालयों को निर्धारित कैलेंडर के अनुसार नामांकन, कक्षाएं, परीक्षा और रिजल्ट जारी करना होगा। केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 7 दिनों की छूट दी जा सकती है।
विश्वविद्यालयों को दिए गए विशेष निर्देश
राजभवन ने सभी कुलपतियों और विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि शैक्षणिक कैलेंडर का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रकाशन की प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर पूरी हो। विशेष परिस्थितियों में सीमित बदलाव की अनुमति हो सकती है, लेकिन पूरे सत्र को समय पर पूरा करना अनिवार्य रहेगा।
बिहार के छात्रों के लिए ऐतिहासिक कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार साबित हो सकता है। लंबे समय से छात्र और अभिभावक विश्वविद्यालयों में सत्र विलंब की समस्या से परेशान थे। अब एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू होने से विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी। यदि सभी विश्वविद्यालय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कार्य करते हैं तो आने वाले वर्षों में बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
छात्रों को होंगे कई बड़े फायदे
1. समय पर पूरा होगा सत्र
अब छात्रों को वर्षों तक सत्र पूरा होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। निर्धारित समय पर कक्षाएं, परीक्षा और परिणाम आयोजित किए जाएंगे।
2. प्रतियोगी परीक्षाओं में मिलेगा लाभ
समय पर स्नातक की डिग्री मिलने से छात्र UPSC, BPSC, SSC, Banking, Railway तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में समय पर आवेदन कर सकेंगे।
3. उच्च शिक्षा में प्रवेश आसान होगा
स्नातक की पढ़ाई समय पर पूरी होने से छात्र PG, B.Ed, MBA, MCA, Law तथा अन्य पाठ्यक्रमों में बिना किसी देरी के प्रवेश ले सकेंगे।
4. रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
कई बार डिग्री में देरी होने के कारण छात्र सरकारी और निजी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पाते थे। अब यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
5. सभी विश्वविद्यालयों में एकरूपता
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एक ही समय पर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होंगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी।
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