स्नातक सिलेबस में बडा़ बदलाव- राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इन बड़े बदलावों पर मुहर लगाई है। नए नियमों के लागू होने से अब बिहार के छात्रों को पढ़ाई के बीच में कोर्स छोड़ने और दोबारा शामिल होने (मल्टिपल एग्जिट और एंट्री) का विकल्प मिलेगा। साथ ही एकरूप पीएचडी. विनियम, स्नातकोत्तर के नए प्रारूप और स्नातक में एक क्षमता संवर्धन कोर्स शुरू करने की भी घोषणा की गई है। चार वर्षीय स्नातक करने वाले छात्र-छात्राएं सीधे पीएचडी में नामांकन के लिए आवेदन कर नेट उत्तीर्ण होने पर नामांकन ले सकेंगे।
स्नातक में मल्टीपल एग्जिट-पढ़ाई बीच में छूटी तो भी बेकार नहीं जाएगा साल
लोकभवन द्वारा स्वीकृत चार-वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तहत अब छात्रों को हर साल के हिसाब से डिग्री या सर्टिफिकेट दिया जाएगा। 1 साल पूरा करने परः छात्र को स्नातक प्रमाणपत्र मिलेगा। 2 साल पूरा करने परः स्नातक डिप्लोमा दिया जाएगा। 3 साल पूरा करने परः स्नातक उपाधि मिलेगी। 4 साल पूरा करने परः ऑनर्स की उपाधि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, जिन छात्रों को छठे सेमेस्टर तक 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए प्राप्त होगा, वे चौथे वर्ष में ‘ऑनर्स विद रिसर्च’ का विकल्प चुन सकेंगे।
एनईपी : अब 1 साल में सर्टिफिकेट, 2 साल में डिप्लोमा; स्नातक में लागू होगा क्रॉसवर्ड्स कोर्स
डिजिटल रिफॉर्म्स: 40% तक ऑनलाइन पढ़ाई की छूट, डिजीलॉकर में जमा होंगे क्रेडिट: बिहार की उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के करीब लाने के लिए सरकार द्वारा अनुमोदित मैसिव ओपेन ऑनलाइन कोर्स (मूक्स) के माध्यम से छात्रों को 40 प्रतिशत तक क्रेडिट ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही डिजिटल लॉकर आधारित ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (एबीसी) व्यवस्था और सतत मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाएगी। इन पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुविषयक शिक्षा और कौशल-आधारित ट्रेनिंग को अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है।
4 साल के ग्रेजुएशन वालों के लिए सिर्फ 1 साल का पोस्ट ग्रेजुएशन
नई व्यवस्था के तहत स्नातकोत्तर कार्यक्रमों की रूपरेखा भी पूरी तरह बदल दी गई है। जो छात्र 4 साल का ग्रेजुएशन पूरा करके आएंगे, उनके लिए पीजी कोर्स केवल 1 वर्ष का होगा। वहीं, 3 साल का ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों के लिए यह कोर्स 2 वर्ष का रहेगा। 2 वर्षीय पीजी करने वाले छात्र भी अगर चाहें, तो पहला साल पूरा करने के बाद ‘स्नातकोत्तर डिप्लोमा’ लेकर कोर्स से बाहर निकल सकते हैं। छात्रों को पीजी में पढ़ाई के लिए केवल पाठ्यक्रम, पाठ्यक्रम के साथ शोध, या फिर सिर्फ शोध करने जैसे कई लचीले विकल्प मिलेंगे।
दिमाग तेज करने को स्नातक में शामिल होगा ‘क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड्स’
विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और संज्ञानात्मक कौशल को निखारने के लिए लोकभवन ने एक बेहद अनोखा प्रयोग किया है। अब सभी विषयों के स्नातक छात्रों के लिए चौथे सेमेस्टर तक ‘क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड्स को दो-क्रेडिट क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है। यह अभिनव कोर्स छात्रों के शब्द-भंडार, संप्रेषण कौशल और समस्या समाधान क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा।
स्नातक उत्तीर्ण पात्र छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश
स्नातक उत्तीर्ण पात्र छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश मिलेगा। इसके तहत 7.5 सीजीपीए या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वालों को यह सुविधा मिलेगी। ऐसे छात्र-छात्रा एक वर्षीय मास्टर डिग्री के बिना भी सीधे पीएचडी में प्रवेश के पात्र होंगे। बिहार लोक भवन ने बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वर्ष 2017 के पुराने पीएचडी नियम समाप्त हो गए हैं।
लोक भवन ने बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस, 2026 को दी मंजूरी
राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की पढ़ाई अब नए नियमों के तहत होगी। तीन वर्षीय स्नातक करने वालों को दो वर्षीय स्नातकोत्तर या चार वर्षीय स्नातक के बाद एक वर्षीय मास्टर डिग्री पूरी करनी होगी। सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 55% अंक तथा आरक्षित वर्गों को यूजीसी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी। नई पीएचडी विनियमावली को यूजीसी के 2022 के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। नया नियम चार जुलाई से प्रभावी माना जाएगा। अब राज्य के संबंधित विवि को वैधानिक निकायों से इसे अपनाना होगा। पीएचडी में प्रवेश केवल यूजीसी नेट, यूजीसी-सीएसआईआर-नेट या गेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही मिलेगा। प्रवेश के लिए 80% वेटेज नेट-गेट अंक और 20% वेटेज साक्षात्कार को दिया जाएगा।
तीन वर्ष शेष होने पर नहीं मिलेंगे नए शोधार्थीः नई व्यवस्था में यह भी प्रावधान किया गया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय बचा होगा, वे नए पीएचडी शोधार्थी नहीं ले सकेंगे।
पीएचडी तीन से छह वर्ष की होगी
पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष और अधिकतम छह वर्ष होगी। विशेष परिस्थितियों में दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा। महिला शोधार्थियों और 40% से अधिक दिव्यांगता वाले शोधार्थियों को अतिरिक्त दो वर्ष की छूट मिलेगी। नए नियमों के तहत सभी पीएचडी शोधार्थियों को शिक्षण, लेखन और शैक्षणिक प्रशिक्षण लेना होगा।
पीजी से पीएचडी तक की व्यवस्था बदली
सूबे में पीजी से लेकर पीएचडी तक की शैक्षणिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। लोकभवन से नयी व्यवस्था पर मुहर लग गयी है। कुलाधिपति सय्यद अता हसनैन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण, लचीली और शोधोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शैक्षणिक सुधारों को स्वीकृति दी है।
इनमें एकरूप पीएचडी विनियम 2026, एक वर्षीय व द्विवर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रमों की नयी शैक्षणिक रूपरेखा, चार वर्षीय सीबीसीएस स्नातक कार्यक्रम में संशोधन व क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड को दो क्रेडिट क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करना प्रमुख है। चार वर्षीय स्नातक के तहत पहले वर्ष की पढ़ाई पूरी करने पर स्नातक प्रमाणपत्र, दूसरे वर्ष के बाद स्नातक डिप्लोमा, तीसरे वर्ष के बाद स्नातक उपाधि व चार वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करने पर ऑनर्स की डिग्री दी जाएगी। छठे सेमेस्टर तक 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए प्राप्त करने वाले चौथे वर्ष में ऑनर्स विथ रिसर्च का विकल्प चुन सकेंगे, जिससे शोध का अवसर मिलेगा।
स्नातक कोर्स में क्या हुआ बड़ा बदलाव?
नई शिक्षा व्यवस्था के तहत स्नातक कोर्स को पहले से अधिक लचीला बनाया गया है। अब छात्र अपनी जरूरत और परिस्थिति के अनुसार पढ़ाई जारी रख सकेंगे। अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो उसकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
नई व्यवस्था कुछ इस प्रकार होगी –
| पढ़ाई की अवधि | मिलने वाला प्रमाण पत्र |
| 1 साल पूरा करने पर | सर्टिफिकेट |
| 2 साल पूरा करने पर | डिप्लोमा |
| 3 साल पूरा करने पर | स्नातक डिग्री |
| 4 साल पूरा करने पर | स्नातक ऑनर्स/रिसर्च डिग्री |
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो किसी कारण से बीच में पढ़ाई छोड़ देते थे। पहले ऐसे छात्रों को कोई डिग्री या प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता था।
स्नातक के बाद सीधे कर सकेंगे PhD
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव पीएचडी एडमिशन को लेकर किया गया है। अब छात्रों को पीएचडी करने के लिए हर स्थिति में मास्टर डिग्री करने की आवश्यकता नहीं होगी। चार वर्षीय स्नातक (4 Year Undergraduate Programme) पूरा करने वाले छात्र निर्धारित योग्यता पूरी करने के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। इसका मतलब है कि जो छात्र रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनका समय बचेगा और वे जल्दी शोध कार्य शुरू कर पाएंगे। हालांकि इसके लिए छात्रों को विश्वविद्यालय और यूजीसी के नियमों के अनुसार जरूरी अंक और अन्य योग्यता पूरी करनी होगी।
7.5 CGPA या उससे अधिक अंक वालों को मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था के तहत अच्छे प्रदर्शन करने वाले छात्रों को विशेष लाभ मिलेगा। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में बेहतर अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी रिसर्च आधारित पढ़ाई की ओर आगे बढ़ सकेंगे। रिपोर्ट के अनुसार 7.5 CGPA या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को रिसर्च विकल्प चुनने का मौका मिल सकता है। ऐसे छात्र स्नातक के बाद सीधे शोध कार्य और पीएचडी की तैयारी कर सकेंगे।
पीजी कोर्स की अवधि में भी बदलाव
नई शिक्षा नीति के तहत पीजी यानी पोस्ट ग्रेजुएशन की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब पीजी की अवधि छात्र के स्नातक कोर्स के आधार पर तय होगी।
3 साल स्नातक करने वाले छात्रों के लिए
जो छात्र तीन वर्षीय स्नातक डिग्री पूरी करेंगे, उन्हें सामान्य रूप से दो वर्षीय पीजी कोर्स करना होगा।
4 साल स्नातक करने वाले छात्रों के लिए
चार वर्षीय स्नातक (Honours/Research) पूरा करने वाले छात्रों के लिए एक वर्षीय पीजी कोर्स का विकल्प रहेगा। इससे छात्रों का समय बचेगा और वे जल्दी अपने करियर या रिसर्च क्षेत्र में आगे बढ़ पाएंगे।
क्रेडिट सिस्टम से होगी पढ़ाई
नई व्यवस्था में क्रेडिट आधारित शिक्षा प्रणाली लागू होगी। छात्रों को प्रत्येक विषय और कोर्स के लिए निर्धारित क्रेडिट प्राप्त करना होगा। क्रेडिट सिस्टम से छात्रों को कई फायदे होंगे जैसे –
- पढ़ाई में अधिक विकल्प मिलेंगे
- विषय बदलने में सुविधा होगी
- दूसरे संस्थान से पढ़ाई जारी रखने में आसानी होगी
- छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा
नई व्यवस्था में डिजिटल माध्यम से भी छात्रों की पढ़ाई और क्रेडिट रिकॉर्ड को बेहतर बनाया जाएगा।
छात्रों को मिलेगा विषय चुनने का ज्यादा विकल्प
पहले छात्रों को सीमित विषयों में ही पढ़ाई करनी पड़ती थी, लेकिन नई व्यवस्था में छात्रों को मल्टी डिसिप्लिनरी एजुकेशन का लाभ मिलेगा। यानी विज्ञान का छात्र दूसरे क्षेत्र के विषय भी पढ़ सकता है और कला या कॉमर्स के छात्र भी अपनी रुचि के अनुसार अन्य विषयों का चयन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखना बल्कि कौशल आधारित शिक्षा देना है।
दिव्यांग छात्रों को मिलेगी अतिरिक्त सुविधा
- नई व्यवस्था में दिव्यांग विद्यार्थियों को भी विशेष सुविधा दी जाएगी।
- 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की सुविधा मिल सकती है।
- इससे सभी वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
नई व्यवस्था कब से लागू होगी?
- मिली जानकारी के अनुसार नई व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार लागू करने की तैयारी की जा रही है।
- विश्वविद्यालयों में स्नातक, पीजी और पीएचडी की पढ़ाई को नई संरचना के अनुसार व्यवस्थित किया जाएगा।
- नियम लागू होने के बाद छात्रों को एडमिशन प्रक्रिया, कोर्स अवधि और परीक्षा प्रणाली में बदलाव देखने को मिलेगा।
छात्रों को क्या फायदा होगा?
इस बदलाव से लाखों छात्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। मुख्य फायदे –
- पढ़ाई छोड़ने पर भी प्रमाण पत्र मिलेगा
- 1 साल में सर्टिफिकेट की सुविधा
- 2 साल में डिप्लोमा मिलेगा
- 4 साल के बाद रिसर्च डिग्री
- स्नातक के बाद सीधे PhD का रास्ता
- समय और पैसे दोनों की बचत
- रोजगार आधारित पढ़ाई को बढ़ावा
IMPORTANT LINKS
| Arattai Group Join | CLICK HERE |
| Whatsapp Group Join | CLICK HERE |
| TELEGRAM | join |
| YOUTUBE | SUBSCRIBE |
बिहार के सभी यूनिवर्सिटी में कक्षाएं शुरू – स्नातक का नया रूटिन देखें



